दर्द हमें क्यों होता है…

दर्द हमें क्‍यों होता है ……… दीप्ति मिश्रा

इतना दर्द हमें क्यों होता है,
कुछ टूटा है या टूट रहा……।

ये मौसम बड़ा सुहाना है,
रितु भी अति मस्तानी है…।
फिर गम के बादल क्यों छाए
कुछ छूटा है या छूटा रहा…..।।

महफिल में हंसी के ठहाके हैं,
हाथों में जाम के प्याले हैं…।
फिर तन्हाई ने क्यों घेरा
कुछ भूला है या याद रहा …..।।

तेरे साथ जो लम्हें गुजारे हैं,
वो जो खुशियों के खजानें हैं…।
फिर आज उदासी क्यों छाई
कुछ दूर हुआ, या दूर रहा…..।।

इतना दर्द हमें क्यों होता है,
कुछ टूटा है या टूट रहा…..।।

14 Comments

  1. mani 13/08/2016
  2. Saviakna 13/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/08/2016
    • Deepti Mishra 20/08/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • Deepti Mishra 20/08/2016
  5. babucm 20/08/2016
    • Deepti Mishra 20/08/2016
  6. शीतलेश थुल 20/08/2016
    • Deepti Mishra 30/08/2016

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