“मेरी नन्ही परी”–शीतलेश थुल

बड़ा ही खूबसूरत था वो एहसास,
जब जिंदगी की हुई एक नयी शुरुआत ,
एक नन्ही सी परी , आयीं जब मेरे हाँथ।

बेहद ही अनमोल था वो पिता बनने का एहसास ,
मेरी नन्ही सी परी थी जब मेरे पास,
सच कहूँ , ना था जीवन में इतना कोई ख़ास,
मेरी नन्ही सी परी थी जब मेरे पास,

रात रात भर वो जागती थी,
मुझे भी साथ में जगाती थी।
ना तो बिस्तर उसे पसंद ना पसंद वो “Pink” झूला ,
मेरी गोद ही उसका बिस्तर मेरी बाँहे उसका झूला।

ना देखे मुझको एक पल तो, रोये चिल्ला चिल्ला के,
रो रो कर वो पूरा घर सर पे सवार लेती थी।
पापा की बाँहो में भरकर ख़ुशी ख़ुशी चिल्लाती थी।

जब भी दफ्तर से घर पहुँचू , ढूँढू उसको चारो ओर ,
लिपट जाये मुझसे वो ऐसे, मेरी खुशियों का ना छोर।
पापा पापा कहती हरदम, निकले थे थोड़े से दांत,
फिर भी घंटो पास मेरे वो ना जाने कहती कितनी बात।

छन छन छन छन पायल बाजे, दौड़े वो घर में चारो ओर ,
मैं भी पीछा करता उसका सुनके मधुर ध्वनि का शोर।
कभी डाँटता कभी डपटता , फिर भी वो हँसते जाती थी।
मुस्कुरा के पापा कहकर फिर शैतानी करती थी।

मेरी थी इक छोटी सी दुनिया,अब उसकी अपनी दुनिया है।
मैं वृद्धावस्था का एक बालक और मेरी बेटी मेरी पापा है।
Continue………..
शीतलेश थुल।

12 Comments

  1. Dr Swati Gupta 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 13/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 13/08/2016
  3. अभिनय शुक्ला 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 20/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 20/08/2016
  5. sarvajit singh 13/08/2016
    • शीतलेश थुल 20/08/2016

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