अपने शौक – शिशिर मधुकर

तुम अपने शौक करो हम तो शोक करते है
दिल से सोचने वाले हरदम ग़मों से मरते हैं
कश्ती में मिल बैठ के जो भी ना विचरते हैं
वो मुसाफिर नदी के पार कभी ना उतरते हैं

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. mani 12/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2016
  3. sarvajit singh 12/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 13/08/2016

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