जुदाई – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

तेरे दिल की धड़कन से
दिल ने धड़कना सीख लिया
तेरी साँसों की नमी से
जीना सीख लिया

जिस दिन ना हो तू पास
वो दिन ही ना हो ख़ास
है दिल की एक ही आस
हो सदा तू मेरे पास

है जमी को आसमा की चाहत
सागर में बरसते पानी की आहट
बूंदों -२ में तेरी यादें
बरसात की ये बातें

इस जुदाई का दर्द ना सह पाउँगा
तेरे बिन ना मैं जी पाउँगा
है एक इल्तिजा तुझसे खुदा
ना कर मुझसे तू उसको जुदा

2 Comments

  1. Savita Verma 13/08/2016
    • gokul72525 17/08/2016

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