आज़ादी की खातिर:-विजय

भूल जाओ क्या कौम है तेरा
भूल जाऊँ क्या कौम है मेरा
याद रखे बस उस वीराने को
पड़ी कीमत चुकानी,आज़ादी के दीवानो को

सींचा है जिसने इस धरती को
अपने खून के हर कतरे से
उनके बलिदान से पुष्पित इस धरती को
फिर न वीरान हम होने देंगे

लाशें बन बिछ गए है जो
अपने वतन के नाम पर
उन लाशो की ही क़द्र हम कर ले
कि फिर कोई लाश न बिछ पाए

ख्वाहिश थी बस इतनी ही कि
कोई उनका रंग दे बसंती चोला
आज़ादी की खातिर अब हम भी
उतार फेंके झूठा मजहबी चोला

हर नागरिक की हो जिम्मेदारी
कोई मजहब आज़ादी पर पड़े न भारी
जय हिन्द……..

13 Comments

  1. mani 15/08/2016
    • vijaykr811 15/08/2016
  2. mani 15/08/2016
  3. C.m sharma(babbu) 15/08/2016
    • vijaykr811 05/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" 05/05/2017
    • vijaykr811 05/05/2017
  5. डी. के. निवातिया 05/05/2017
    • vijaykr811 05/05/2017
  6. bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
    • vijaykr811 05/05/2017
  7. ANU MAHESHWARI 05/05/2017
    • vijaykr811 05/05/2017

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