इज़हार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना जाने कब होगा इज़हार मेरी मोहब्बत का,
ना जाने कब होंगे बयां लव्ज़ मेरे ।
चाहता हूँ तुझे इस कदर,
कह भी न पाया, कह भी ना पाऊं ।।

क्यों तुझे सोचता हूँ,
पाकर भी खोजता हूँ ।
जाने क्यों ये होता है,
दिल मेरा रोता है ।।

नींद ना है अब तो,
चैन भी खोया है ।
होठों पर तेरा बस तेरा ही नाम है,
दिल को भी तेरा ही इंतजार है ।।

चाहा बहुत मगर, कह ना पाया,
दिल की बातों को दिल में ही पाया ।
पाने को तुम्हे दिल तड़पता है,
जाने ये कैसा एक रिश्ता है ।।

आकर तू मुझको थाम ले,
मुझको तू अपना नाम दे,
हसरतें अब मेरी
आरज़ू है तेरी ।।

11 Comments

  1. babucm 12/08/2016
  2. gokul72525 12/08/2016
  3. tamanna 12/08/2016
  4. gokul72525 12/08/2016
  5. mani 12/08/2016
  6. gokul72525 12/08/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
  8. gokul72525 12/08/2016
  9. Savita Verma 13/08/2016
  10. gokul72525 13/08/2016
  11. happy 17/08/2016

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