लक्ष्‍य को साध

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जिंदगी प्‍यार का खेल ना कोई तमाशा है
मत छोड़ उम्‍मीद अभी जीत की आशा है
महनत कम मत होने दे लक्ष्‍य को साध
मंजिल थोड़ी सी दुर फिर क्‍यों निराशा है
अभिषेक शर्मा अभि
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मुक्तक

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9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 12/08/2016
  2. babucm 12/08/2016
  3. mani 12/08/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 12/08/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 12/08/2016
  6. sarvajit singh 12/08/2016
  7. Savita Verma 13/08/2016

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