हौसला अफ़ज़ायी

ये हुनर मुझे भी आ जाएगा
वक्त के साथ सब बदल जाएगा।

मुसीबत कब तक रहेगी सर पे आखिर
कोई हल तो ज़रूर निकल जाएगा।

इन रातों के अंधेरो से घबराना नहीं
सुबह का चराग इन्हें भी निगल जाएगा।

चाहे लाख मुश्किलें आए रुकना नहीं
इरादे बुलंद रिखए वक्त भी बदल जाएगा।

चाहे जो काम करो झोंक डालो खुदको
इबादत हो शिद्दत से तो पत्थर भी पिघल जाएगा।

एक इंसान हूँ मैं कोई मामूली आदमी नहीं
जो चंद सिक्के देखे और बदल जाएगा।

बुलंदी पर अपनी कभी गुरूर ना करना
अभी चढ़ता सूरज है सांझ पड़े ढ़ल जाएगा।

इसकी झोली में कई खुर्शीद आते है ढ़लने को
इस फ़कीर से भला तु आगे कैसे निकल जाएगा।

5 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 11/08/2016
    • दीपेश जोशी 11/08/2016
  2. Kajalsoni 11/08/2016
  3. Savita Verma 11/08/2016
  4. दीपेश जोशी 11/08/2016

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