मेरी दादी

तू नाज़ुक सी , चंचल सी , हिरनी की तरह
तेरी ज़ुबाँ मीठी है बहुत मिश्री की तरह …
मेरे मन में तेरी मूरत सज गयी ऐसे..
जैसे तू हो निर्मल, छलकती नदी की तरह …

तू है सपना मेरा , या हकीकत ज़माने की है
तू है मेरी ,या फिर अमानत मेरे फ़साने की है
तेरे कदमो में पड़ी है मेरी सारी खुशियां ..
मेरी ज़िद्द ,मेरी चाहत और मेरी सारी दुनिया ..

तू मेरी है ,मेरी कहानी है बस तू …
कोई और नहीं बस मेरी दादी है तू ……..

6 Comments

  1. babucm 11/08/2016
    • tamanna 11/08/2016
  2. babucm 11/08/2016
    • tamanna 11/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  4. Kajalsoni 11/08/2016

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