“दर्द-ए-दिल”

चुभते हैं फूल भी हमें काँटों जैसे ,
जब उनकी बेवफ़ाई याद आती है ,
बयाँ हम कैसे करें उनकी ‘बे-मुरब्बत’
उनकी आँखों में मासूमियत सी नजर आती है ।।
– आनन्द कुमार

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 11/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
    • ANAND KUMAR 11/08/2016
  3. ANAND KUMAR 11/08/2016
  4. babucm 11/08/2016
  5. sarvajit singh 11/08/2016

Leave a Reply