मोहब्बत – ग़ज़ल – सर्वजीत सिंह

मोहब्बत

जब भी हो जाती है मोहब्बत तो हर बात सुहानी लगती है
लड़का भी दीवाना होता है और लड़की भी दीवानी लगती है

बस इक दूजे के संग जीने मरने के सपने सजाने लगते हैं
सब रिश्ते नाते लगते अन्जाने दुनिया भी बेगानी लगती है

मोहब्बत इक ऐसा नशा है बस मदहोशी का आलम होता है
फिर दिल में उमंगें मचलती हैं ज़िन्दगी मस्तानी लगती है

सच्ची मोहब्बत के परवानो कि हर इक बात निराली होती है
इक दूजे के लिए मर मिटना मोहब्बत कि निशानी लगती है

सच्चा प्यार मिलता है बड़ी मुश्किल से ये तो नसीब की बात है
गर महोब्बत मिल जाये सर्वजीत खुदा की मेहरबानी लगती है

सर्वजीत सिंह
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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
  2. mani 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
  4. Dr Swati Gupta 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
    • sarvajit singh 13/08/2016
  5. Rohan 14/08/2016
  6. sarvajit singh 14/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/08/2016
    • sarvajit singh 14/08/2016

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