स्वत्व की तलाश “” “” “””सविता वर्मा

संवेदनाओं की कसौटी पर कसती है जिन्दगी
इस कसौटी पर कहाँ खरी उतरती है जिन्दगी।

जिन्दगी के लय को सम्भाल कर चलने की कोशिश में
सहज सरस कहाँ रह पाती है जिन्दगी।

हर किसी के अन्तर्मन का अपना दव्न्द
इस मन के दव्न्द से कहाँ निकल पाती है जिन्दगी।

स्त्री मन का अपना रहस्य, स्वत्व की तलाश
इन गहराइयों को कहाँ पाती है जिन्दगी।

आओ ढूढे मिलकर सुकुन की रहबर
अलम में ऐसा घर कहाँ पाती है जिन्दगी।।
सविता वर्मा

7 Comments

  1. sarvajit singh 12/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 13/08/2016
  3. babucm 13/08/2016
  4. Savita Verma 13/08/2016
  5. Savita Verma 13/08/2016
  6. Savita Verma 13/08/2016

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