“यादें-3”

फुर्सत के पलों में तेरे साथ जीया
हर लम्हा याद आता है।।

हफ्तों से गुमसुम बादलों से ढका
आसमान का वो खाली कोना याद आता है।

कोहरे की चादर संग बारिश मे भीगते हुए
तुमसे बिछड़ना याद आता है।

छोटी सी पहाड़ी उस पे मन्दिर
मन्दिर का दीपक याद आता है।

बादल बरसे या बरसी आँखें
आँखों का गीलापन याद आता है।

फुर्सत के पलों में तेरे साथ जीया
हर लम्हा याद आता है।।

“मीना भारद्वाज”

16 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
  2. babucm 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
  4. arshad siddiqui 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 09/09/2016
    • Meena bhardwaj 09/09/2016
  6. ALKA 23/09/2016
  7. Meena Bhardwaj 23/09/2016

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