रंगीली सी “” “””” “” “” “” सविता वर्मा

ये कैसी सुबह है,
जो खुबसूरत है पर लगती थोड़ी अधूरी सी
मिल जाओ राहों में हो जाये थोड़ी पूरी सी
सुरज की पौ फट जायेगी, चिड़िया चहचहा उठेगे
कौन सा रंग डाला मुझपे, रंग लिया मुझे रंगीली सी।।

10 Comments

  1. sarvajit singh 10/08/2016
  2. Saviakna 10/08/2016
  3. ANAND KUMAR 11/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 11/08/2016
  5. Saviakna 11/08/2016
  6. babucm 11/08/2016
  7. mani 11/08/2016
  8. Kajalsoni 11/08/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 11/08/2016
  10. Savita Verma 11/08/2016

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