तेरी चाह

जिंदगी क्या है किसे पता
सपना है कोई या फिर कोई प्रेम कथा
तेरे पहलू में मुझे तोह बस जीना है
बाकी दुनिया क्या है मुझे क्या पता

तेरी मासूमियत भरे सवालो से घिरे
कलम को कागज़ की चाह जगी हो जैसे
मेरी नींदों से जग कर अक्सर मैंने
मेरी रातो को तेरे ख्वाभ दिए हो जैसे !!!

14 Comments

    • tamanna 10/08/2016
  1. mani 10/08/2016
    • tamanna 10/08/2016
  2. Kajalsoni 10/08/2016
    • tamanna 10/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
    • tamanna 10/08/2016
    • tamanna 10/08/2016
  4. Bimla Dhillon 10/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  6. Saviakna 10/08/2016
  7. babucm 11/08/2016

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