राहें उल्फत की – शिशिर मधुकर

हालात आज देखो कितने बदल गए हम उनके बगल से तन्हा निकल गए
अपनों ने घाव देने में कसर ना छोड़ी पर हम ही थे जो फ़िर भी सँभल गए

पहले तो दर्द होता था बड़ा बेहिसाब कोई तोड़ देता था जब भी हसीन ख्वाब
अक्सर मिलें धोखों ने वो असर किया चलते रहे हम नए रस्ते निकल गए

तेरे सिवा समझा नहीँ हमको ये ज़माना जिंदगी बन गई हैं दर्द का फ़साना
उम्मीदों ने फ़िर भी साथ ना छोड़ा देखा तुम्हे तो सीने में अरमां मचल गए

राहें उल्फ़त की कभी आसां नहीँ होती अक्सर आँखो में नींदें भी नहीँ होती
हमने तो बढ़ाए क़दम सोच समझ कर फ़िर भी राहों में अकेले फिसल गए

होता हैं वो जो यहाँ किस्मत में लिखा हैं हमको तो अब तलक यही दिखा हैं
मधुकर वो क्या समझेंगे जज्बातों को तेरे हर अदा से जब अपने ही जल गए

शिशिर मधुकर

24 Comments

  1. शीतलेश थुल 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  4. babucm 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  5. mani 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  6. Kajalsoni 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  7. Manjusha 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  8. Meena bhardwaj 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  9. sarvajit singh 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  10. Dr Swati Gupta 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  11. ANAND KUMAR 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/08/2016
  12. Saviakna 10/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 11/08/2016

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