माँ

हमारी ऊँगली पकड़कर
वो हमें चलना सिखाती है
खुद भूखी रहकर भी
हमें पेट भर खिलाती है

जो गिरे कभी हमारे आंसू
वो समंदर बहा देती है
देखने को हमारे होंटो पे हँसी
सारी ज़िन्दगी लुटा देती है

हमारी हर जरूरतों का
रखती है ख्याल
हमने खाना खाया या नहीं
यही हमेशा पूछती है सवाल

की सो सके हम शुकुन से
उसे सारी रात जागते देखा है
कौन कहता है भगवान दिखाई नहीं देते
मैंने माँ में भगवान् को देखा है

लोग ढूंढते है भगवान् को
मंदिर,मस्जिद और चर्च में
भगवान् तो है हर घर में
हमारी माँ के रूप में
भगवान् तो है हर घर में
हमारी माँ के रूप में

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 09/08/2016
    • sudarshan41 09/08/2016
  2. Kajalsoni 09/08/2016
    • sudarshan41 09/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
  4. C.m.sharma(babbu) 09/08/2016
  5. mani 10/08/2016
  6. mani 10/08/2016

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