मेरे यार

कोई नहीं होगा जब तेरे पहलू के दरमियां
तड़पती हुई आहों से जब आप झुलसेंगे
बरसती क्यों हैं आखिर तेरा नाम लेने से
उस शाम को आकर तेरी पलकों से पूछेगे

क़त्ल करने के तरीके बहुत हैं साकी
तेरे आस्तीन में क्या छुपा, क्यों हम पूछेंगे
भरोसा इतना भी नहीं क्या अपने सागिर्द पर
तेरा नाम ले ले कर दुआओं में कितना चीखेगे

होगा सामना जो कभी खुदा की रहमत से
ये चाँद और तारे तेरी सदाओं में झूमेंगे
जो रूठ भी गए कुछ बदगुमां होकर
तेरा नाम लिख लिखकर पत्थरों को भी पूजेगें

मैं मिट भी जाऊं तो मेरे यार तू सुन ले
यादों के चश्मों चिराग कब्र में भी भीगेंगे
गुनाहों की सजा मेरे सफीक कुछ भी दे
कांटे बनकर भी तेरे पल्लू में अटकेंगे

2 Comments

  1. अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 09/08/2016
  2. rakesh kumar rakesh kumar 16/05/2020

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