मुहब्बत के परिंदे……….

मुहब्बत के परिंदो को नींद से क्या वास्ता
खवाबो में भी याद रखते बस एक रास्ता
ना खबर होती है दिन की उन्हें न रात की
खुद से रहे गाफिल जग जाहिर रहे दांस्तां !!
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डी. के. निवातियाँ [email protected]@@

गाफिल = बेखबर

24 Comments

  1. ANAND KUMAR 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  3. mani 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  6. Kajalsoni 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  7. sarvajit singh 08/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/08/2016
  8. MANOJ KUMAR 09/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
  9. अभिनय शुक्ला 09/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
  10. Meena bhardwaj 09/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/08/2016
  11. Dr Swati Gupta 09/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/08/2016

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