“मित्रता”

मित्रता तपन में फुहार सी
ठंडक का अहसास देती है।
मित्रता बिन मांगे मोती
आंचल में हो तो
खुशियों की सौगात देती है।
मित्रता व्यक्ति की निज छांव
दुख-सुख में साथ रहती है।
बहुत कम होते हैं सुदामा
जिनके मित्र स्वयं भगवान होते हैं।
यदि हो सच्चे मित्र साथ
तो जीवन के हर क्षण
मित्रता-दिवस समान होते हैं।

“मीना भारद्वाज”

14 Comments

    • Meena bhardwaj 07/08/2016
  1. ALKA 07/08/2016
    • Meena bhardwaj 07/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" 07/08/2016
    • Meena bhardwaj 07/08/2016
  3. C.m.sharma(babbu) 07/08/2016
    • Meena bhardwaj 07/08/2016
  4. sarvajit singh 07/08/2016
    • Meena bhardwaj 08/08/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
    • Meena bhardwaj 08/08/2016
  6. Kajalsoni 08/08/2016
  7. Meena bhardwaj 08/08/2016

Leave a Reply