याराना………

बसते है हम जिन यारो के दिलो में
उन दिल को अपना घराना कहते है ।
जिनका हर लफ्ज छेड़ता है कानो में
सरगम की तान उसे तराना कहते है ।
मिले अनेको इस राहे सफर में “धर्म* को
कुछ बस गये मन मंदिर में सदा के लिए,
बिन मुलाक़ातो के बन गया जिन संग नाता
ऐसे अटूट बंधन को हम याराना कहते हैं ।।

“मित्रता दिवस पर साहित्य परिवार के सभी सदस्य मित्रो को हार्दिक बधाई”



डी. के. निवातियाँ

20 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  3. Kajalsoni 07/08/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  5. mani 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  6. Shishir "Madhukar" 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  7. sarvajit singh 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  8. Dr Swati Gupta 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  9. Gumnam Kavi 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  10. ALKA 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016
  11. Meena bhardwaj 07/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 07/08/2016

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