‘नीम’ के नाम

कल जहाँ रहता था
था,नीम का पेड़ वहाँ भी
रहता हुँ आज जहाँ
है,नीम का पेड़ यहाँ भी

फ़र्क बस इतना है
कल मैं उसके निचे था,
और प्रयत्नशील था चढ़ने को
पर आज मैं ऊपर हूँ
और नयीवाली वो “लाल पत्तियां”
जिन्हे जरुरत पड़ने पर
तोड़ सकता हुँ..
दवाईयों के लिए …
जब चाहुँ तब…………..

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/08/2016
    • अभिनय शुक्ला 07/08/2016
    • अभिनय शुक्ला 07/08/2016

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