अफ़साना

अफ़साना
********

अपनों का साथ भी अनजाना हो गया
आज यहाँ हर शक्स बेगाना हो गया
किसके भरोसे पर ईमान की दौलत छोड़े
बदनीयत आज ये ज़माना हो गया
टीसती मौन ये कलेजे में
खूनी पंजे में हर मुहाना हो गया
जिंदगी का हर दाँव नाकाम रहा
सितम पर सितम ढहा अफ़साना हो गया

आज यहाँ हर शक्स बेगाना हो गया !!

डॉ सी एल सिंह

8 Comments

  1. mani 04/08/2016
    • Dr Chhote Lal Singh 04/08/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 04/08/2016
  3. Kajalsoni 04/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 04/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/08/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 04/08/2016
  7. sarvajit singh 04/08/2016

Leave a Reply