मिट्टी…………….मनिंदर सिंह “मनी”

मिट्टी मिट्टी को देख,
सपने सजा रही,
मिट्टी मिट्टी में मिल,
मिट्टी बढ़ा रही,
मिट्टी मिट्टी से,
नज़रे मिला रही,
मिट्टी मिट्टी को,
देख हँस रही,
मिट्टी मिट्टी के,
विरोह में रो रही,
मिट्टी मिट्टी के,
टीले बना रही,
मिट्टी अपने रूप
पर इतरा रही,
मिट्टी रिश्तो की,
ड़ोर बांधे जी रही,
मिट्टी मिट्टी हो जाएगी,
फिर किस बात का,
गुमान कर रही,
मिट्टी अमरता का,
वहम लिए जी रही,
ऐ “मनी” जी ले जिंदगी को,
क्या पता अगले पल का ?
वक्त के हाथो हार,
आग में, कही मिट्टी में,
खुद को मिट्टी मिट्टी कर रही,

22 Comments

  1. Dr Swati Gupta 03/08/2016
    • mani 03/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
    • mani 03/08/2016
  3. Kajalsoni 03/08/2016
    • mani 03/08/2016
  4. mani 03/08/2016
    • kiran kapur gulati 04/08/2016
      • mani 04/08/2016
  5. ANAND KUMAR 03/08/2016
    • mani 04/08/2016
  6. ALKA 03/08/2016
    • mani 04/08/2016
  7. Shishir "Madhukar" 03/08/2016
    • mani 04/08/2016
  8. sarvajit singh 04/08/2016
    • mani 04/08/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/08/2016
    • mani 04/08/2016
  10. C.m.sharma(babbu) 04/08/2016
    • mani 05/08/2016

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