दिल चाहता हैं !

दिल चाहता हैं पानी बनकर
मै तेरी आँखो में बस जाऊँ
दिल चाहता हैं अवाज़ बनकर
मै तेरी सुरों में गूँज जाऊँ
कभी दिल चाहता हैं कि सूरज बनकर
मै तेरी बादल सी काली जूल्फो में खो जाऊँ
अतिम सकुन मिलता हैं जब तेरी जुल्फें
मेरे चेहरे से यूँ सरकता हैं
स्वतः आँखे बंद हो जाती हैं
दिल को ठंडक सी लग जाती हैं
मानो जैसे कोई बर्फ का टूकड़ा हो
जब तेरी हाथ मेरे सीने को आती हैं
जब तेरी आँखे मेरी आँखो से टकराती हैं
दिल कि धड़कन वही थम जाती हैं
न सूरज दिखता हैं न चाँद दिखता हैं
बस तेरी ही प्यार का अश्मान दिखता हैं
अगर मै कोई फूल हूँ
तो , उस फूल कि रंग हो तुम
अगर तुम कोई फूल हो
तो ,भौंरा हूँ मै
जब तेरी अवाज़ न कानों को आती हैं
दिल कि बेचैनीय बढ़ जाती हैं
तड़पने लगता हैं दिल मेरा
जैसे बीन पानी कि कोई मछ्ली तड़पती हैं
मै नहीँ जनता कि ,
इस जिंदगी का अंत कहाँ हैं
कब चाँद ढल जाएँगा
और सूरज निकल आएगा
इस जुदाई का मीठा सा दर्द
कोई धरती और अशमान से
समझ सकता हैं
अपनी आँखे नम न करना
दिल कि धड़कन कम न करना
बस अपनी होठों पे प्यारी सी
मुस्कान भरके चाँद को देख
मेरे नाम कर देना…..मेरे नाम कर देना….!

………………….रवीन्द्र कुमार…………………

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
    • RAVINDRA KUMAR RAMAN 05/08/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • RAVINDRA KUMAR RAMAN 05/08/2016

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