मुक़द्दरों के कसूर – शिशिर मधुकर

दूर रहकर भी है कोई पास कोई पास रहकर भी दूर हैं
किसी से क्या करें शिकवा ये सब मुक़द्दरों के कसूर हैं
बिना जतनों के जिसने इस जहाँ में पा लिया सब कुछ
असलियत भूल कर उनको तो काबिलियत का गुरूर हैं
कोई पी पी के पिंजर हो गया पर ग़म से ना उबर सका
कोई बिन पीए ही झूमता हैं और एकदम नशे में चूर हैं

शिशिर मधुकर

18 Comments

  1. mani 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  3. ALKA 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  4. Meena bhardwaj 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  5. Kajalsoni 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी 02/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  7. sarvajit singh 02/08/2016
  8. Shishir "Madhukar" 03/08/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/08/2016
  10. C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • Shishir "Madhukar" 03/08/2016

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