ये जिंदगी

हमने अपना आज त्याग कर बचचों का जीवन सवार दिया
फिर भी पता नहीं उन्होंने हमें क्यों नकार दिया

क्या कमी रह गयी हमारी परवरिश मैं की आज ये दिन देखा
शायद यही है हमारे भाग्य की रेखा

आज हम बूढे है कल तुम भी होंगे
तुम भी वही सब सहोगे

5 Comments

  1. mani 01/08/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  3. babucm 01/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" 01/08/2016

Leave a Reply