नशा……………३

नशा इश्क का हो तो मुहबब्त से दामन जोडता है,
जुबान बंद होती है मगर नजरो से बहुत कुछ बोलता है
आबाद हुआ तो ठीक है, वरना इस बेरहम जमाने मे
लैला कोई मजनूँ बनके राहो मे पागलो सा डोलता है ।।




डी. के. निवातियॉ………… @

22 Comments

  1. sarvajit singh 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  2. ANAND KUMAR 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  5. Shishir "Madhukar" 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  6. Kajalsoni 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  7. ALKA 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  8. mani 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  9. Meena bhardwaj 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
  10. C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 03/08/2016

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