निशब्द स्नेह – शिशिर मधुकर

आज भी मुझको वो घड़ी खूब याद हैं
मेरी जिंदगी जब रूठी और बिखर गई
प्रेम की देवी ने फ़िर ऐसा करम किया
एक निशब्द स्नेह से किस्मत संवर गई

जिसका जहाँ दीवाना था रूप देखकर
उसने मुझे देखा मेरी तकलीफों से इतर
उस अपनेपन ने मुझे मरहम लगा दिया
और जिंदगी बेजार नहीँ ये सिखा दिया

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  3. mani 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  4. Kajalsoni 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  5. Dr Swati Gupta 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2016
  7. sarvajit singh 31/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 01/08/2016

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