बाढ़ विभिषका (हाइकू)

प्रचंड बाढ़
खौफनाक मंजर
अवर्णनीय!!

जल शैलाब
आया बन प्रलय
अकल्पनीय!!

तम से घिरी
आपदा भरी निशा
असहनीय!!

बेघर जीव
अस्त-व्यस्त जीवन
अकथनीय!!

बेबस आँखें
सब बदहवास
अविस्मर्णीय!!

देती दस्तक
भीषण महामारी
अवांछनीय!!

मृदाक्षरण
फसल की बर्बादी
अपूरणीय!!

विनाश लीला
प्रकृति का सन्देश
विचारणीय!!
!!!!
!!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

30 Comments

  1. Meena bhardwaj 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
      • Meena bhardwaj 30/07/2016
        • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  3. sarvajit singh 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  4. babucm 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  6. mani 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  7. RAJEEV GUPTA 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  9. Kajalsoni 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  10. Dushyant Patel 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  11. Dr Swati Gupta 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  12. अरुण कुमार तिवारी 30/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016

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