मैने तुम पर गीत लिखा है

एक नही सौ-२ है रिस्ते
है रिस्तो की दुनियादारी,
कौन है अपना कौन पराया
जंजीरे लगती है सारी
तोड़के दुनिया के सब बंधन
तुमको अपना मीत लिखा है||
मैने तुम पर गीत लिखा है…

देख कर तुमको सोचा मैने
क्या इतनी मधुर ग़ज़ल होती है?
जैसे तू ज़ुल्फो को समेटे
वैसे क्या रागो को पिरोती है?
खोकर तेरे अल्हड़पन मे
तेरी धड़कन को संगीत लिखा है||
मैने तुम पर गीत लिखा है…

क्या मोल है तेरा ये बतला,
अपना अभिमान भी बेच दिया
पाने की खातिर तुझको,
मैने सम्मान को बेच दिया
सबकुछ खोकर है तुमको पाना
हार को अपनी जीत लिखा है||
मैने तुम पर गीत लिखा है…

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 29/07/2016
    • shivdutt 29/07/2016
  3. mani 29/07/2016
  4. shrija kumari 29/07/2016
  5. Kajalsoni 29/07/2016
    • shivdutt 29/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 29/07/2016
    • shivdutt 29/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • shivdutt 30/07/2016
    • shivdutt 30/07/2016
    • shivdutt 30/07/2016

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