मेरी सोच

मेरी सोच
वक़्त और हालात मैं नही बदल सकता ,
और ना ही भाग्य का लिखा।
मैंने तो सिर्फ अपनी सोच बदली ,
बाकि सब अपने आप बदल गया।
और दोस्त कहने लगे “शीतलेश बदल गया”।
=============================================
तेरी और मेरी दास्ताँ भी कितनी अजीब है।
बयां करने जो बैठा अल्फाज़ो ने साथ छोड़ दिया।
सोचा लिख कर ही बतायेंगे अपने अफ़साने।
कोरे कागज़ ने ही सब कुछ बयां कर दिया।
============================================
शीतलेश थुल !!

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 29/07/2016
  2. babucm 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 01/08/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 01/08/2016
  4. mani 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 01/08/2016
  5. Kajalsoni 29/07/2016
    • शीतलेश थुल 01/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • शीतलेश थुल 01/08/2016

Leave a Reply to शीतलेश थुल Cancel reply