कितने अलग रंग – शिशिर मधुकर

जिंदगी कितने अलग रंग तू दिखाती है
कभी रावण हमें कभी राम तू बनाती हैं
जब भी हम स्वार्थी रूप को अपनाते हैं
सभी अपने यहाँ फ़िर गैर नज़र आते हैं
ओछी बातों से उठकर जो संग रहते हैं
वही रघुकुल के पुरुषों सा नाम पाते हैं

शिशिर मधुकर

21 Comments

  1. babucm 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  2. mani 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  3. Kajalsoni 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  4. शीतलेश थुल 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  6. Meena bhardwaj 29/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  7. RAJEEV GUPTA 29/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 29/07/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 29/07/2016
  10. Shishir "Madhukar" 29/07/2016

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