कजरी

सभी सुधी जन अग्रज मित्रों पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर सोनभद्र भदोही वाराणसी और गोरखपुर के जिलों में सावन के महीने में एक अमर लोक गीत कजरी गाई जाती है। अलग अलग जिलों की कजरी का रूप भी अलग अलग होता है। सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिर्जापुरी कजरी को मिली है। समय के साथ इन लोक गीतों का बिलोपन हो रहा है।
इसी मिर्जापुरी कजरी को समर्पित एक वियोग श्रृंगार की गीत(कजरी) लिक्ख रहा हूँ। इसके शब्द भोजपुरी के नजदीक होते है!
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बीतल जाला देखा सावनी बहार पिया
आजा अबकी बार पिया ना!

बहे लागल पुरबी बयार! लागे जिया न हमार!!
लागे जिया न हमार ……….
लागे जिया न हमार ……….!!
झर झर बहे लागल असुवन का धार पिया
आजा अबकी बार पिया ना!!

पपीहा जियरा जलावे! ननदी हमके चिढावे!!
ननदी हमके चिढावे …………
ननदी हमके चिढावे …………!!
डाले झुला उ अमवा के डार पिया
आजा अबकी बार पिया ना!!

तू गइला कउने देस! देला एको ना सन्देश!!
देला एको ना सन्देश ………..
देला एको ना सन्देश ………..!!
सवत बनी गइल नौकरी तोहार पिया
आजा अबकी बार पिया ना!!

छोड़ दा दुसरे का गुलामी! मिलके करीं जा किसानी
मिलके करीं जा किसानी……….
मिलके करीं जा किसानी ………!!
भरल रही सुख से घर संसार पिया
आजा अबकी बार पिया ना!!
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सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”

24 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
  2. sarvajit singh 28/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
  3. sarvajit singh 28/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  6. Dr C L Singh 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  7. mani 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  8. Kajalsoni 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  9. Meena bhardwaj 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  10. RAJEEV GUPTA 29/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/07/2016
  11. Er Anand Sagar Pandey 05/08/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/08/2016

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