कमल की कलम भाग 8

आईने के तस्सवुर में इश्क की तस्वीर नहीँ होती है
अफ़सानों में नहीँ हकीक़त तो अंजुमन में बयां होती है
मोहब्बत की परख तो पैगामों से ही मज़बूत होती है
वीरानों में तो अक्सर खुद से ही बातें हो जाया करती है॥

……. कमल जोशी…….

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/07/2016
  2. रामबली गुप्ता 28/07/2016
  3. C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016

Leave a Reply to सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप Cancel reply