कमल की कलम भाग 7 आंसू

आंखो के रास्ते निकले जो पानी
कीमत नहीँ होती उसकी कहानी
तनहाइयों में होता है वो आवारा
पतझड़ में घूमता मन बन बंजारा
मुस्कानें भी हो जाती हैं बेमानी
आँसुओं की देखी ऐसी निशानी॥

……. कमल जोशी…….

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/07/2016
    • K K JOSHI 28/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
  3. C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016

Leave a Reply