मौसम हैं ये प्रेम का

सावन पर मुक्तक रचना
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सावन के झूलों पर पिया मेरा अधिकार
मेरे साजन अब तो सुनो दिल की पुकार

सो ना पाऊ अधूरे हैं मेरे सारे स्‍वप्‍न
आवो मेरे स्‍वप्‍न में उन्‍हे करो साकार

सावन भी सताये अगर हो पिया नाराज
भूल जाओ हर पीड बता दो दिल के राज

मौसम हैं ये प्रेम का दिल केे छेड़ राग
सावन में नृत्य करू देखो मेरे नटराज
अभिषेक शर्मा “अभि”
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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/07/2016
  2. mani 28/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
  4. रामबली गुप्ता 28/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
  6. Kajalsoni 28/07/2016
  7. C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
  8. sarvajit singh 28/07/2016

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