कोशिश में………….मनिंदर सिंह “मनी”

भटकती नज़रे, भीगी पलके,
कदम बढ़ रहे इसी आस में,
मिल जाओगे आगे चल के,
नाखुशी किस बात की तुमको,
क्यों छोड़ गए तन्हा मुझको,
हर हाल में मना लूंगा मिल के,
मेरे जीने की वजह तू, तूने,
पढ़ा था कभी मेरी आँखों में,
छूट ना पाएंगे हाथो से हाथ,
बंधे थे एक दूसरे के दिल से,
जाते नहीं छुपाये आँखों में अश्क,
पाया था तुम्हे, किस्मत से लड़ के,
छुड़ा ना सके दामन तेरी यादो से,
कीमती पैमाने मैख़ाने में मिल के,
जिन्दा रखने की कोशिश में,”मनी”
तुझे अपने अल्फाज़ो में लिख के,

19 Comments

  1. Meena bhardwaj 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  3. Raj Kumar Gupta 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  5. C.m.sharma(babbu) 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  6. sarvajit singh 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  7. अरुण कुमार तिवारी 28/07/2016
    • mani 28/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
    • mani 28/07/2016
    • mani 28/07/2016
  9. राकेश पांडेय 18/03/2017

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