आतंक—2……..मनिंदर सिंह “मनी”

मुस्कुराती एक छवि मेरे सामने आयी,
पूछो क्या पूछते हो ? मैं हु आतंक,
विस्फोटक, ईष्या के दीये तुमने जलाये,
बदनाम मुझे करके, कह चीख उठा आतंक,
जेहाद, स्वराज, नया राज, तो एक छोटा सा,
हिस्सा है, कह अचानक रो उठा आतंक,
तुम्हारी इच्छओं के बोझ तले दबते तुम्हारे,
बच्चो के दिलो में, राज करता, मैं हु आतंक,
बेघर ना कर दे कही, तुम्हारी औलादे,
बूढो के दिलो में वजह बन बैठा, मैं हु आतंक,
नवजन्मे बच्चो के साथ रेप के घटनाओ में,
विकराल रूप धारण किये, मैं हु आतंक,
लड़की अपने ही घर में अपनों से ही अपशब्दो का,
घुट पीने की मजबूरी बना, मैं हु आतंक,
मेरे चिराग को, सुहाग को, रौंद ना दे कोई,
बन ख्याल सताने वाला मैं हु आतंक,
महसूल चोरी कर, कीमते बढ़ा दी,
महँगाई से लोगो का दम घोटता मैं हु आतंक,
बिक रहा हर कोई यहाँ, ना बिकने वालो की,
लगा बोली ईमान खरीदने वाला मैं हु आतंक,
अन्धविश्वाश में लिपटा, झूठे कर्म-कांडो से सजा,
कुछ बुरा ना हो जाये, सोच में डूबा मैं हु आतंक,
कितनी सुन्दर थी कुदरत, क्या हाल बना दिया तूने ?,
चीरहरण देख उसके सवालो में उलझा, मैं हु आतंक,
तू वो देख और बता रहा, जो दूसरा गलत कर रहा,
तेरे अंदर देख ईष्या, क्रोध, माया से सना मैं हु आतंक,
रब ने इंसानो की बस्ती बनाई, महजब,जात-पात,
ऊँच-नीच को तेरी सोच से बाटता, मैं हु आतंक,
डर, ख़ौफ़, अंदेशा, दहशत, तहलका, संत्रास,
तेरे दिये हज़ारो नामो में जी रहा, मैं हु आतंक,
लालसाओं, अंहकार, तेरी सोच ने, मुझे जन्मा, ऐ इंसा,
तू ही बता मेरा महजब कौन सा ? पूछता मैं हु आतंक,
क्या सोचने पर मजबूर कर देगा लोगो को,
किधर जा रहे हम, ऐ “मनी” तेरा लिखा आंतक,

18 Comments

  1. babucm 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  6. sarvajit singh 27/07/2016
    • mani 27/07/2016
  7. Kajalsoni 27/07/2016
    • mani 28/07/2016
  8. Dr C L Singh 27/07/2016
    • mani 28/07/2016

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