नाफरामोशी

अब दोष मुकद्दर को क्यो दे साहिब,
यहां तो बात अपने अपने उसूलो की थी उनको था पसंद वतन से
नाफरामोशी कर परदेश को जाना
एक हम थे,
जो इस मिटटी से जुदा होना कतई गंवारा न था…..।।



डी. के. निवातियॉ [email protected]@@

16 Comments

    • निवातियाँ डी. के. 31/07/2016
  1. C.m.sharma(babbu) 31/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/07/2016
  2. sarvajit singh 31/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" 01/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  4. Kajalsoni 01/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  5. mani 01/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  6. Er Anand Sagar Pandey 05/08/2016
    • निवातियाँ डी. के. 05/08/2016

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