सावन की प्‍यासी धरती

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बादल मेघा को जम के बरसायें
बगीया महकी फुल खिल आये
सावन की प्‍यासी धरती लहकी
सावन तो प्‍यार का झूला झुलाये
अभिषेक शर्मा “अभि”
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शीर्षक मुक्तक

जय महर्षि गौतम

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
  2. babucm 27/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
  4. mani 27/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
  6. Meena bhardwaj 27/07/2016
  7. sarvajit singh 27/07/2016
  8. अरुण कुमार तिवारी 28/07/2016

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