इज़हार-ए-मोहब्बत

जीत में वो मजा कहाँ
कभि हारकर भी देखो
करे जो कभि डूब जाने का मन
सच कहती हूँ प्यार कर के देखो

कितना सुन्दर होता है
किसिका दिल को छू जाने का एहसास
किसी के प्यार में खुद को डुबाकर के देखो

माना की कठिन है इज़हार-ए मोहब्बत
माना की सब उठाना न चाहे ये ज़हमत
पर है ये एहसास खुदा का दिया तोहफा
उसकी हामी पाना ही क्यूँ हो अपनी इल्तज़ा
कभि उसके इनकार को भी स्वीकार करके देखो

उसकी हसी में डूब जाने का जो मन करे
उसकी इनकार से रूठ जाने का जो मन करे
उसकी चूड़ियों की खनक दिल में लिए
उसे टूट कर प्यार करने का जो मन करे
इतने खुबसूरत एहसासों को दिल में क्यूँ दबाएँ
कहे वो चाहे जो भी
एकबार इज़हार करके देखो

उसकी जरा सी तकलीफ से ये आँखे रो पड़ती है
उसके होने के एहसास से ही ये साँसें चलती है
है ये एहसास कितने ख़ास
हकीकत के चश्मे को उतार करके देखो…….

20 Comments

  1. mani 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  3. babucm 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  6. sarvajit singh 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  7. Meena bhardwaj 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016
  8. Kajalsoni 27/07/2016
    • shrija kumari 27/07/2016

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