जीने की राह

जीने की राह पर
निकल गया तो अब जाने दो
घड़ी मौत की आ रही
करीब तो आने दो .

परवाह उसे क्या
कांटों पर जिसका जीवन है
मुश्किलें क्या कर पायेगी
अर्पित जिनका तन मन है

दुर्गम पथ में हालात
बदलने को मिट जाने दो
जीने की राह पर …….

कैद घरों में मंजिल का
ठिकाना नहीं होता
डगमग इरादों के पीछे
ज़माना नहीं होता

तूफानों में लहरों से
टकराती कश्ती
बह जाने दो
जीने की राह पर …..

जीत रहा जो जंग
कद्र की कहाँ कमी है
रखा हौसला जो भी मन में
पुलकित गगन जमी है .

कर्मनिष्ठ का ओढ़ कलेवर
रम जाने दो
जीने की राह पर
निकल गया तो अब जाने दो
!!
!!
डॉ.सी.एल.सिंह
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

9 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
  4. babucm 27/07/2016
  5. mani 27/07/2016
  6. RAJEEV GUPTA 27/07/2016
  7. Kajalsoni 27/07/2016
  8. Dr C L Singh 27/07/2016
  9. sarvajit singh 27/07/2016

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