नाज़ुक – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

नाज़ुक

बहुत नाज़ुक होता है रिश्ता मोहब्बत का
जो ज़रा सी ठेस से ही टूट जाता है ………………….
चाहे लाख वादे कर लो साथ जीने मरने के
पर ज़रा सी ग़लतफ़हमी से बरसों का साथ छूट जाता है ………………..

शायर : सर्वजीत सिंह
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16 Comments

    • sarvajit singh 27/07/2016
  1. mani 27/07/2016
    • sarvajit singh 27/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
    • sarvajit singh 27/07/2016
  3. Kajalsoni 27/07/2016
    • sarvajit singh 27/07/2016
  4. Raj Kumar Gupta 27/07/2016
    • sarvajit singh 27/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" 27/07/2016
    • sarvajit singh 27/07/2016
  6. C.m.sharma(babbu) 27/07/2016
  7. sarvajit singh 27/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
    • sarvajit singh 28/07/2016

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