मौत और रिस्ते

देखते रह गये
मौत हो गयी
लौट के न आने वाला
यह प्राण
दे गया धोखा।

फंसा गया दलदल में
सदा के लिए
मिट्टी में मिला गया
हवा में विलिन होकर
अग्नि में चला गया।

पता भी नहीं चला
अवशेष क्या है
पाॅच तत्व का शरीर
किसी से कुछ नहींे लिया
किसी का मोहताज भी नहीं।

खाली हाथ आया था
बिलकुल नंगा
रिस्ते बनानें
प्यार से दिल जोड़ने
अपने कर्तव्यों को साकार
मिथ्या को कड़वा सत्य करने।

ये रिस्ते
सब के सब बेकार
दिल जीतने वाला
आज कौन है गांधी
वासना और स्वार्थ
रिस्ता को दगा दे गया।

अंजान बने रह गये
हम आप और वो
कुछ नहीं कर पाये
पंछी पिंजड़ा छोड़क
कहीं और डउ़ गया
भावनाओं में फंस गये हम।

आइये इंसान बनें
देखते.देखते
मौत आ जायेगी
आत्मा निकलकर
कहीं दूर चली जायेगी
शेष रह जायेगा
यह पार्थिव शरीर।

फिर से आग में जलेगा
मिट्टी में दफन हो जायेगा
मजबूर हो जायेंगे
हमारा यह रिस्ता
देखते रह जायेगी आत्मा
मोह.जाल और माया में
फंस जायेंगे हम।

बी पी शर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

13 Comments

  1. mani 26/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 26/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
  3. रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
  5. C.m.sharma(babbu) 26/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016
  6. Dr C L Singh 27/07/2016
    • Bindeshwar prasad sharma (bindu) 27/07/2016

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