मगरूर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

मगरूर

मैं तो डरता हूँ उसकी तारीफ़ करने से ………………………..
के कहीं वो ओर भी मगरूर ना हो जाये
हम तो दीवाने हैं उसके हुस्न के ………………………………………
लगता है इस दिल से कोई कसूर ना हो जाये

शायर : सर्वजीत सिंह
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18 Comments

  1. babucm 25/07/2016
    • sarvajit singh 25/07/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
    • sarvajit singh 25/07/2016
    • sarvajit singh 25/07/2016
  3. mani 25/07/2016
    • sarvajit singh 25/07/2016
  4. सोनित 25/07/2016
    • sarvajit singh 25/07/2016
      • kiran kapur gulati 25/07/2016
        • sarvajit singh 26/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016
    • sarvajit singh 26/07/2016
  6. Dr Chhote Lal Singh 26/07/2016
    • sarvajit singh 26/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" 26/07/2016

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