वर दे……….

ऐ खुदा तू बस इतना कर दे ।
सबके दामन खुशिया भर दे ।।

जग में रहे न कोई भूखा नंगा ।
तन मन से सबको खुश कर दे ।।

दुनिया में जो कातिल जुल्मी ।
उनके भेजे में सदबुद्धि भर दे ।।

प्रेम की भाषा सब मिलअर बोले
दिमाग से नफरत की छुट्टी कर दे ।।

द्वेष भाव ना किसी हृदय पनपे
भावोको इतना संचित कर दे ।।

जात पात न हो भेद ऊँच नीच का
जग में इंसानियत का संचार कर दे ।।

सत कर्म की सब राह अपनाये
दुष्कर्मो से ऐसा मनविमुख कर दे ।।

हाथ जोड़ विनती करता हूँ भगवन
सबके संग मेरा भी उद्धार कर दे ।।

जग में बुरा न मैं रहू ,ना जग ये बुरा होये
सतमार्ग पर सदा चलूं मुझको ऐसा वर दे !!

डी. के. निवातियाँ[email protected]??

26 Comments

  1. RAJEEV GUPTA 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  2. रामबली गुप्ता 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  4. Meena bhardwaj 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  5. mani 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  6. babucm 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  8. Kajalsoni 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  9. sarvajit singh 25/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/07/2016

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