शायर

वो जो शायर था
बड़ा ख़ामोश सा था
अक्सर बहकी-बहकी
बातें करता था

ख़्वाब थे उसके
चाँद सितारों के लेकिन
वो अक्सर जमीन की
बातें करता था

मैंने बहुत से वक्त
गुजारे हैं संग में
वो अक्सर गमगीन सी
बातें करता था

वो जो शायर था
बड़ा ख़ामोश सा था
अक्सर बहकी-बहकी
बातें करता था

समंदर से परहेज भी उसने
सख़्त रखे थे
पर क्यूँ वो नमकीन सी
बातें करता था

पहली बारिश सा
बड़ा अल्हड़ सा था
सौंधी-सौंधी महकी सी
बातें करता था

मनमौजी सा
उड़ा-उड़ा सा रहता था
परिन्दों जैसी चहकी सी
बातें करता था

वो जो शायर था
बड़ा ख़ामोश सा था
अक्सर बहकी-बहकी
बातें करता था

11 Comments

  1. Rinki Raut 24/07/2016
    • poet.tanha 24/07/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
    • Poet Tanha 24/07/2016
  3. Kajalsoni 24/07/2016
    • poet.tanha 24/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 24/07/2016
    • poet.tanha 24/07/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 24/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016
  7. mani 25/07/2016

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