नज़रों के घायल – शिशिर मधुकर

ऐ हुस्न अपनी ताकत का तुझे अंदाजा ही नहीँ
तेरी नज़रों के घायल तो मिल जाते हैं हर कहीँ
जो तू अपने करम दिल से किसी पर भी वार दे
हर ओर से बिखरे इंसान की भी हस्ती संवार दे.

ऐ इश्क तेरा जादू भी तो जहाँ में कुछ कम नहीं
जो तू ना साथ दे तो कभी ना खिलें चमन कहीँ
तेरे आगोश में जब भी मुझे सर रखने को मिला
मेरे सीने में पडी ठंडक ओर हर अंग अंग खिला

शिशिर मधुकर

20 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  3. Raj Kumar Gupta 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  4. mani 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  6. Kajalsoni 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  7. C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  8. Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  9. Meena bhardwaj 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/07/2016
  10. sarvajit singh 24/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/07/2016
  11. Dr Chhote Lal Singh 25/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/07/2016

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