जिन्दगी अधूरी है

जिन्दगी अधूरी है
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बाप देखो बुढ़े हैं
माँ भी देखो बूढ़ी है
सेवा सत्कार बिना
जिंदगी अधूरी है ।

वक्त की दुहाई देता
कारवां ये जा रहा
जिसको देखो अपनी धुन में
मस्त हँसता गा रहा
धूमिल आँखों की गरिमा से
क्यों बढ़ती जाती दूरी है
बाप देखो बुढ़े हैं …….

वह निराला आला
मन वाला मतवाला
मुश्किल में जीवन डाला
करता उनको नित ठाला
ग़म के आँसू पीते तात
ये कैसी मजबूरी है
बाप देखो बुढ़े हैं ……

चिपकी चमड़ी धसती आँखे
रुक रुक कर चलती हैं सांसे
पीठ पेट सब एक हो गया
उनकी इच्छा क्या पूरी है
बाप देखो बुढ़े हैं …….

गर बिलखता रहा
रूह माँ बाप का
अंजाम कैसे भुगतेगा
हर श्राप का
नासमझ हो जा सजग
इसमे भलाई तेरी है
बाप देखो बुढ़े हैं
माँ भी देखो बूढ़ी है
सेवा सत्कार बिना
जिंदगी अधूरी है !!
!
!
डॉ सी एल सिंह

6 Comments

  1. C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 24/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" 24/07/2016
  5. Kajalsoni 24/07/2016
  6. sarvajit singh 24/07/2016

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